डूब गया तो सोच रहा हूं बह जाऊं बहते पानी में

शुक्रबार, मंसिर १९, २०७७

जब जब हम उतरे पानी में
उलटे थे साए पानी में

जिनकी खातिर हाथ बढ़ाया
वो ही ले डूबे पानी  में

डूब गया तो सोच रहा हूं
बह जाऊं बहते पानी में

सोचो क्या क्या बह जाता है
आंखों से निकले पानी में

सपनों के पौधे मत पूछो
डूब गए गमले पानी में

जाने वो कैसे उभरेगा
चुल्लू भर फैले पानी में

अब मैंने भी जान लिया है
तू भी है कितने पानी में

दुख है बस इस बात का “नायक”
डूबे हम छिछले पानी में

मन शाह “नायक”
जिला जोधपुर राजस्थान,इन्डिया