साहित्य

डूब गया तो सोच रहा हूं बह जाऊं बहते पानी में

By मनासलु

December 04, 2020

जब जब हम उतरे पानी में उलटे थे साए पानी में

जिनकी खातिर हाथ बढ़ाया वो ही ले डूबे पानी  में

डूब गया तो सोच रहा हूं बह जाऊं बहते पानी में

सोचो क्या क्या बह जाता है आंखों से निकले पानी में

सपनों के पौधे मत पूछो डूब गए गमले पानी में

जाने वो कैसे उभरेगा चुल्लू भर फैले पानी में

अब मैंने भी जान लिया है तू भी है कितने पानी में

दुख है बस इस बात का “नायक” डूबे हम छिछले पानी में

मन शाह “नायक” जिला जोधपुर राजस्थान,इन्डिया