कैसे कैसे लोग सयाने निकले हैं ख़ुद नादाँ हैं पर समझाने निकले हैं

आइतवार, पुस १९, २०७७
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कैसे कैसे लोग सयाने निकले हैं
ख़ुद नादाँ हैं पर समझाने निकले हैं

आज तलक़ जो अपनी मंज़िल पा न सके
वो दुनिया को राह दिखाने निकले हैं

आंधी जब उत्पात मचाकर दौड़ गई
बस्ती वाले शोर मचाने निकले हैं

जिनकी ख़ातिर ढाल बने हर मुश्किल में
वो हम पर ही तीर चलाने निकले हैं

धरती पर तो पाँव न उनके टिक पाए
मंगल पर संसार बसाने निकले हैं

अपना जीवन बहता पानी है जिस पर
हम सपनों की शक्ल बनाने निकले हैं

कौन प्यार का मोल समझता है ” नायक”
सब जिस्मों की आग बुझाने निकले है

मन शाह “नायक”
सूरसागर, जिला जोधपुर
राज्य राजस्थान, भारत

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